
चंद्रमौली गड्डामनुगु: आकाश की यात्रा के पीछे के वैज्ञानिक
क्या हुआ?
डॉ. चंद्रमौली गड्डामनुगु, जिन्हें 2026 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया, ने आकाश मिसाइल प्रणाली के विकास में 30 से अधिक वर्षों का समय समर्पित किया।
मुख्य बिंदु
- डॉ. गड्डामनुगु ने 1983 में आकाश मिसाइल प्रणाली पर काम करना शुरू किया।
- उन्हें 2026 में उनके योगदान के लिए पद्म श्री पुरस्कार मिला।
- आकाश मिसाइल प्रणाली का सफल प्रदर्शन ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हुआ।
- डॉ. गड्डामनुगु ने रक्षा अनुसंधान और विकास प्रयोगशाला में एक छोटे दल के साथ काम किया।
- आकाश प्रणाली के लिए कई परीक्षणों और विभिन्न विशेषज्ञों के बीच सहयोग की आवश्यकता थी।
- आकाश मिसाइल का उत्पादन 2009 में शुरू हुआ, और इसे 2015 में भारतीय वायु सेना में औपचारिक रूप से शामिल किया गया।
मुख्य अंतर्दृष्टि
- आकाश मिसाइल प्रणाली की सफलता भारत की रक्षा क्षमताओं को बढ़ा सकती है।
- डॉ. गड्डामनुगु की पहचान भविष्य की पीढ़ियों के वैज्ञानिकों को प्रेरित कर सकती है।
- मिसाइल विकास में सहयोगात्मक प्रयास जटिल परियोजनाओं में टीमवर्क की आवश्यकता को उजागर करता है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
डॉ. गड्डामनुगु का काम भारत की रक्षा प्रौद्योगिकी में प्रगति के लिए समर्पण के महत्व को उजागर करता है।
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स्रोत
India Today


