
को-वर्किंग ने भारत में आईटी/आईटीईएस को पीछे छोड़ दिया: अनारॉक रिपोर्ट
भारत के कार्यालय स्थान बाजार में जनवरी से सितंबर 2026 के बीच को-वर्किंग ने पहली बार आईटी/आईटीईएस को पीछे छोड़ दिया है, अनारॉक रिसर्च के अनुसार। को-वर्किंग क्षेत्र ने कुल मांग का 26% हिस्सा लिया।
क्या हुआ?
भारत के कार्यालय स्थान बाजार में जनवरी से सितंबर 2026 के बीच को-वर्किंग ने पहली बार आईटी/आईटीईएस को पीछे छोड़ दिया है, अनारॉक रिसर्च के अनुसार। को-वर्किंग क्षेत्र ने कुल मांग का 26% हिस्सा लिया।
AI संक्षिप्त सारांश
अनारॉक के अनुसार, को-वर्किंग ने पहली बार आईटी/आईटीईएस को पीछे छोड़कर भारत में सबसे बड़ा कार्यालय स्थान धारक बन गया है।
मुख्य बिंदु
- को-वर्किंग ने पहली बार भारत में सबसे बड़े कार्यालय स्थान धारक के रूप में आईटी/आईटीईएस को पीछे छोड़ दिया है।
- को-वर्किंग क्षेत्र ने जनवरी से सितंबर 2026 के बीच कुल कार्यालय मांग का 26% हिस्सा लिया।
- आईटी/आईटीईएस ने कुल कार्यालय स्थान मांग का 25% और बीएफएसआई ने 21% हिस्सा लिया।
- को-वर्किंग और बीएफएसआई की मांग मिलकर 2026 के पहले नौ महीनों में कुल पट्टे का 47% पहुंच गई।
- लचीले कार्यक्षेत्र अब कॉर्पोरेट विकास रणनीतियों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन रहे हैं।
मुख्य अंतर्दृष्टि
- को-वर्किंग स्पेस का उदय कार्यालय स्थान के उपयोग में एक संरचनात्मक बदलाव को दर्शाता है।
- उद्यम लचीले कार्यक्षेत्रों के माध्यम से चुस्ती और पूंजी दक्षता पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
- नए व्यापार मॉडल के उभरने के साथ लचीले कार्यालय समाधानों की मांग बढ़ने की उम्मीद है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
यह बदलाव भारत में व्यवसायों के बीच लचीले कार्यक्षेत्रों की बढ़ती प्राथमिकता को दर्शाता है।
स्रोत
Business Standard


