
नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने जीडीपी पद्धति में डबल डिफ्लेशन पर चर्चा की
नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिरी ने कहा कि भारत की जीडीपी पद्धति में डबल डिफ्लेशन पर बहस महत्वपूर्ण मुद्दा नहीं है। उन्होंने कहा कि यह पद्धति व्यावहारिक है और इसे सुधारा जा सकता है।
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क्या हुआ?
नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिरी ने कहा कि भारत की जीडीपी पद्धति में डबल डिफ्लेशन पर बहस महत्वपूर्ण मुद्दा नहीं है। उन्होंने कहा कि यह पद्धति व्यावहारिक है और इसे सुधारा जा सकता है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
जीडीपी पद्धति पर चर्चा भारत में आर्थिक नीति और निवेश निर्णयों को प्रभावित कर सकती है।
मुख्य बिंदु
- अशोक कुमार लाहिरी ने कहा कि जीडीपी में डबल डिफ्लेशन पर बहस में कोई विजेता नहीं है।
- उन्होंने कहा कि डबल डिफ्लेशन अव्यावहारिक नहीं है और इसे सुधारा जा सकता है।
- पद्धति के बारे में चिंताएँ अब उठी हैं, जबकि जीडीपी वृद्धि दर कम है।
- डबल डिफ्लेशन उत्पादकों और उपभोक्ताओं दोनों से मूल्य प्रभावों को हटाता है।
- आंकड़ों के मंत्रालय ने नए जीडीपी श्रृंखला में डबल डिफ्लेशन को पेश किया।
मुख्य अंतर्दृष्टि
- लाहिरी की टिप्पणियाँ आर्थिक पद्धतियों में स्पष्टता की आवश्यकता को दर्शाती हैं।
- जीडीपी पद्धति की जांच आर्थिक डेटा में सार्वजनिक विश्वास को प्रभावित कर सकती है।
- डेटा संग्रह में सुधार जीडीपी गणनाओं की विश्वसनीयता को बढ़ा सकता है।
AI संक्षिप्त सारांश
नीति आयोग के अशोक कुमार लाहिरी जीडीपी पद्धति में डबल डिफ्लेशन की व्यावहारिकता पर चर्चा करते हैं।
स्रोत
The Hindu


