'हमारे सिस्टम में प्रक्रिया सजा बन जाती है': पूर्व SC जज संजय कौल उमर खालिद, शार्जील इमाम की जमानत याचिकाओं पर
क्या हुआ?
पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज संजय कौल ने सजा से पहले की लंबी हिरासत की आलोचना की, यह कहते हुए कि यह सजा के रूप में कार्य करती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जमानत सामान्यतः नियम होनी चाहिए।
मुख्य बिंदु
- संजय कौल ने कहा कि सजा से पहले की अवधि एक सजा के रूप में कार्य करती है।
- उन्होंने आमतौर पर जमानत पर उदार दृष्टिकोण अपनाया है।
- कौल ने कई न्यायाधीशों द्वारा लंबी हिरासत के बारे में उठाए गए चिंताओं का उल्लेख किया।
- खालिद और इमाम पर अवैध गतिविधियों (रोकथाम) अधिनियम के तहत आरोप हैं।
- सुप्रीम कोर्ट ने 5 जनवरी 2026 को खालिद और इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया।
- दिल्ली उच्च न्यायालय ने सितंबर में भी उनकी जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया।
मुख्य अंतर्दृष्टि
- लंबी हिरासत जमानत प्रक्रियाओं में कानूनी सुधार की मांग को जन्म दे सकती है।
- जमानत पर न्यायिक दृष्टिकोण भविष्य के न्यायालय के निर्णयों को प्रभावित कर सकता है।
- यह मामला भारत में आरोपित व्यक्तियों के साथ व्यवहार के बारे में व्यापक चिंताओं को दर्शाता है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
यह चर्चा भारत के कानूनी प्रणाली में सजा से पहले की हिरासत के मुद्दों को उजागर करती है।
संस्थाएँ
स्रोत
Times of India


