
20 वर्षों में 171 IIT छात्र आत्महत्याओं के पीछे के पैटर्न का विश्लेषण
एक रिपोर्ट में बताया गया है कि 2006 से सितंबर 2026 के बीच 171 IIT छात्रों ने आत्महत्या या अप्राकृतिक कारणों से जान गंवाई। डेटा में परिसर स्थान, शैक्षणिक दबाव और जाति विषमताओं से संबंधित चिंताजनक पैटर्न उजागर होते हैं।
क्या हुआ?
एक रिपोर्ट में बताया गया है कि 2006 से सितंबर 2026 के बीच 171 IIT छात्रों ने आत्महत्या या अप्राकृतिक कारणों से जान गंवाई। डेटा में परिसर स्थान, शैक्षणिक दबाव और जाति विषमताओं से संबंधित चिंताजनक पैटर्न उजागर होते हैं।
AI संक्षिप्त सारांश
एक रिपोर्ट में 2006 से 2026 के बीच 171 IIT छात्र आत्महत्याओं का खुलासा किया गया है, जो शैक्षणिक दबाव और जाति विषमताओं से जुड़े पैटर्न को उजागर करता है।
मुख्य बिंदु
- 2006 से सितंबर 2026 के बीच 171 IIT छात्रों ने आत्महत्या या अप्राकृतिक कारणों से जान गंवाई।
- 2006 और 2015 के बीच 51 मौतें दर्ज की गईं, जबकि 2016 से सितंबर 2026 के बीच 120 हुईं।
- 82% दर्ज की गई आत्महत्याएँ परिसर में हुईं।
- परीक्षा और परिणाम के महीनों में मौतें बढ़ती हैं, जिससे समर्थन प्रणालियों की चिंता बढ़ती है।
- SC और ST छात्रों की आत्महत्या की दर सामान्य श्रेणी के छात्रों की तुलना में दोगुनी है।
- पुरुष BTech छात्र और महिला PhD शोधकर्ता दर्ज की गई आत्महत्याओं का लगभग 60% हिस्सा बनाते हैं।
मुख्य अंतर्दृष्टि
- कैंपस में आत्महत्याओं का उच्च प्रतिशत मानसिक स्वास्थ्य समर्थन की कमी को दर्शाता है।
- परीक्षा के समय आत्महत्याओं के पैटर्न से परामर्श सेवाओं को बढ़ाने की आवश्यकता का संकेत मिलता है।
- आत्महत्या की दर में जाति विषमताएँ IITs के भीतर संभावित प्रणालीगत असमानताओं की ओर इशारा करती हैं।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
ये निष्कर्ष IITs में प्रणालीगत मुद्दों को उजागर करते हैं जो छात्र मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा को प्रभावित कर सकते हैं।
स्रोत
India Today


