
भारत का कौशल अंतर: प्रशिक्षण हमेशा नौकरियों की ओर क्यों नहीं ले जाता
क्या हुआ?
भारत के कौशल विकास प्रयासों पर प्रशिक्षण की प्रभावशीलता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अर्थशास्त्री मिताली निकोर रोजगार के परिणामों पर ध्यान देने की आवश्यकता पर जोर देती हैं।
मुख्य बिंदु
- प्रधान मंत्री कौशल विकास योजना के तहत 56.89 लाख उम्मीदवारों में से 24.3 लाख को नौकरी मिली, 42.8% प्लेसमेंट दर हासिल की।
- भारत की बेरोजगारी दर सितंबर 2026 में 5.0% पर स्थिर रही, शहरी श्रम बल भागीदारी में सुधार हुआ, विशेष रूप से महिलाओं में।
- स्नातक डिग्री वाले 50.3% श्रमिक अर्ध-कुशल नौकरियों में कार्यरत हैं, जो योग्यता और नौकरी कौशल के बीच असंगति को दर्शाता है।
- मिताली निकोर का तर्क है कि प्रशिक्षण की सफलता को नौकरी प्लेसमेंट और वेतन परिणामों से मापना चाहिए, न कि केवल प्रशिक्षित व्यक्तियों की संख्या से।
मुख्य अंतर्दृष्टि
- प्रशिक्षण कार्यक्रमों और उद्योग की मांग के बीच का अंतर आर्थिक विकास में बाधा डाल सकता है।
- नौकरी प्लेसमेंट दरों में सुधार के लिए प्रशिक्षण प्रदाताओं और नियोक्ताओं के बीच सहयोग की आवश्यकता हो सकती है।
- कौशल असंगति को दूर करने से स्नातकों की रोजगार क्षमता बढ़ सकती है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों की प्रभावशीलता भारत में रोजगार दरों में सुधार और स्थायी आजीविका सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है।
स्रोत
Times Now