नासा ने नई सटीक तकनीक से पृथ्वी के केंद्र की गति को मापा
नासा के वैज्ञानिकों ने पृथ्वी के द्रव्यमान केंद्र की गति को मापने के लिए एक नई विधि विकसित की है, जो पानी, बर्फ और हवा में मौसमी परिवर्तनों के कारण बदलती है। यह शोध उपग्रह नेविगेशन और सतह ऊंचाई माप को बेहतर बनाता है।
क्या हुआ?
नासा के वैज्ञानिकों ने पृथ्वी के द्रव्यमान केंद्र की गति को मापने के लिए एक नई विधि विकसित की है, जो पानी, बर्फ और हवा में मौसमी परिवर्तनों के कारण बदलती है। यह शोध उपग्रह नेविगेशन और सतह ऊंचाई माप को बेहतर बनाता है।
AI संक्षिप्त सारांश
नासा की नई विधि पृथ्वी के द्रव्यमान केंद्र की गति को मापती है, जो उपग्रह नेविगेशन के लिए महत्वपूर्ण है।
मुख्य बिंदु
- पृथ्वी का द्रव्यमान केंद्र मौसमी परिवर्तनों के कारण बदलता है।
- नासा की जेट प्रोपल्शन प्रयोगशाला ने एक नई मापने की तकनीक विकसित की।
- यह गति कई मिलीमीटर हो सकती है, जो उपग्रह नेविगेशन को प्रभावित करती है।
- इस आंदोलन के प्रमुख योगदानकर्ता महासागर, वायुमंडल और महाद्वीपीय जल हैं।
- नई विधि लेजर माप और जीपीएस ट्रैकिंग को जोड़ती है।
मुख्य अंतर्दृष्टि
- ये निष्कर्ष बताते हैं कि पृथ्वी के जल और वायु का द्रव्यमान जो गोलार्धों के बीच चलता है, पहले से सोचा गया था उससे छोटा है।
- सुधरे हुए मापने की तकनीक वैश्विक शिपिंग लॉजिस्टिक्स और सटीक कृषि में सुधार कर सकती है।
- यह शोध मानचित्रण और नेविगेशन के लिए बेहतर संदर्भ प्रणालियों की ओर ले जा सकता है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
पृथ्वी के केंद्र की गति को समझना उपग्रह नेविगेशन प्रणालियों में सुधार के लिए महत्वपूर्ण है।
स्रोत
Science Daily
