
पर्युषण महापर्व 2026: प्रमुख नियम और तिथियाँ
जैन धर्म का पर्व पर्युषण 8 सितंबर 2026 से शुरू होकर 15 सितंबर 2026 तक चलेगा। इस दौरान श्रद्धालु आत्म-नियमन और अहिंसा पर ध्यान केंद्रित करते हैं।
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क्या हुआ?
जैन धर्म का पर्व पर्युषण 8 सितंबर 2026 से शुरू होकर 15 सितंबर 2026 तक चलेगा। इस दौरान श्रद्धालु आत्म-नियमन और अहिंसा पर ध्यान केंद्रित करते हैं।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
यह पर्व अनुयायियों में आत्म-चिंतन और नैतिक जीवन जीने को प्रोत्साहित करता है।
मुख्य बिंदु
- पर्युषण 8 सितंबर 2026 से शुरू होकर 15 सितंबर 2026 तक चलेगा।
- इस दौरान श्रद्धालुओं को कंदमूल सब्जियों से परहेज करना होगा।
- सूरज डूबने से पहले भोजन करना आवश्यक है, रात में केवल पानी या जूस पीने की अनुमति है।
- व्यक्तियों को नकारात्मक भाषण से बचने और सादगी बनाए रखने की सलाह दी जाती है।
- अहिंसा पर जोर दिया जाता है और जीवों को नुकसान पहुँचाने से बचने की सलाह दी जाती है।
मुख्य अंतर्दृष्टि
- यह पर्व अनुशासित जीवनशैली को बढ़ावा देता है, जिससे समुदाय में बंधन बढ़ सकता है।
- कुछ खाद्य पदार्थों से परहेज करने से इस अवधि में आध्यात्मिक ध्यान बढ़ सकता है।
- अहिंसा का पालन करने से दैनिक जीवन में करुणा की भावना बढ़ सकती है।
AI संक्षिप्त सारांश
पर्युषण महापर्व 8 सितंबर 2026 से शुरू होगा, जो आत्म-नियमन और अहिंसा पर केंद्रित है।
स्रोत
India Today



