
रावण का पुतला दिन में नहीं, शाम को ही क्यों जलाया जाता है?
क्या हुआ?
दशहरे पर रावण का पुतला जलाना बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। यह परंपरा प्रदोष काल के शुभ समय से जुड़ी है।
मुख्य बिंदु
- दशहरा, जिसे विजयादशमी भी कहा जाता है, आज मनाया जा रहा है।
- रावण का पुतला जलाना भगवान राम द्वारा रावण पर विजय का प्रतीक है।
- प्रदोष काल को रावण दहन के लिए शुभ समय माना जाता है।
- यह समय सूर्यास्त के आस-पास होता है, जो 45 मिनट पहले और बाद तक रहता है।
- इस समय रावण दहन करने से नकारात्मक शक्तियों को रोकने का विश्वास है।
मुख्य अंतर्दृष्टि
- यह प्रथा बुराई पर अच्छाई की जीत के सामुदायिक मूल्यों को मजबूत करती है।
- रावण दहन अनुष्ठानों में समय के महत्व की याद दिलाता है।
- प्रदोष काल के साथ संबंध ब्रह्मांडीय ऊर्जा में विश्वास को उजागर करता है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
रावण दहन के समय को समझना सांस्कृतिक परंपराओं की सराहना को बढ़ा सकता है।
स्रोत
India Today



