
ऋषिकेश-कार्नप्रयाग रेलवे लाइन धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देगी, सीमा पहुंच को मजबूत करेगी
क्या हुआ?
125 किलोमीटर लंबी ऋषिकेश-कार्नप्रयाग रेलवे लाइन उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में कनेक्टिविटी बढ़ाने का लक्ष्य रखती है, जिससे केदारनाथ और बद्रीनाथ जैसे तीर्थ स्थलों तक पहुंच आसान होगी।
मुख्य बिंदु
- यह रेलवे लाइन 125 किलोमीटर लंबी है और 12 स्टेशनों के माध्यम से ऋषिकेश को कार्नप्रयाग से जोड़ती है।
- इसका उद्देश्य केदारनाथ और बद्रीनाथ, प्रमुख तीर्थ स्थलों तक पहुंच में सुधार करना है।
- रेलवे की 83% लंबाई सुरंगों के माध्यम से बनाई जाएगी।
- इस परियोजना में 28 मुख्य और बचाव सुरंगें और 57 प्रमुख और छोटे पुल शामिल हैं।
- कार्नप्रयाग भारत-चीन सीमा से लगभग 123 किलोमीटर दूर है।
- यह रेलवे लाइन स्थानीय व्यापार के अवसरों और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाएगी।
मुख्य अंतर्दृष्टि
- बेहतर रेलवे कनेक्टिविटी से क्षेत्र में पर्यटकों की संख्या बढ़ सकती है।
- यह परियोजना निर्माण और स्थानीय व्यवसायों में नौकरी के अवसर पैदा कर सकती है।
- सुदूर क्षेत्रों में आवश्यक आपूर्ति के परिवहन में सुधार हो सकता है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
यह रेलवे लाइन धार्मिक स्थलों तक पहुंच को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ा सकती है, जिससे पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ावा मिलेगा।
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स्रोत
India Today



