SAI ने यूरोप में भारतीय बैडमिंटन सितारों को बिना फंडिंग के छोड़ दिया
क्या हुआ?
पीवी सिंधु और लक्ष्य सेन ने जर्मनी में हायलो ओपन में खिताब जीते, लेकिन भारतीय खिलाड़ियों को यूरोपीय दौरे के दौरान फंडिंग की समस्याओं का सामना करना पड़ा। भारतीय खेल प्राधिकरण ने फंड जारी नहीं किया, जिससे खिलाड़ियों को अपनी खर्चों का ध्यान रखना पड़ा।
मुख्य बिंदु
- सिंधु और सेन ने हायलो ओपन में खिताब जीतकर भारत के यूरोपीय बैडमिंटन अभियान का समापन किया।
- खिलाड़ियों को आर्कटिक ओपन से कुछ दिन पहले बताया गया कि फंडिंग प्रदान नहीं की जाएगी।
- सिंधु ने कुछ खर्चों का प्रबंधन खुद किया और ओलंपिक गोल्ड क्वेस्ट से मदद मिली।
- खिलाड़ियों को दौरे के दौरान यात्रा, भोजन और आवास के खर्चों का ध्यान रखना पड़ा।
- फंडिंग समस्या का संबंध एशियाई खेलों में भारत के प्रदर्शन से हो सकता है।
- SAI ने कहा कि बैडमिंटन संघ द्वारा समय पर फंडिंग प्रस्ताव नहीं भेजा गया।
मुख्य अंतर्दृष्टि
- फंडिंग की कमी भविष्य में अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में भारतीय खिलाड़ियों की भागीदारी को कम कर सकती है।
- खिलाड़ियों को पर्याप्त समर्थन के बिना अपने प्रदर्शन स्तर को बनाए रखने में कठिनाई हो सकती है।
- यह घटना भारत में खेल फंडिंग में प्रणालीगत समस्याओं को उजागर करती है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
फंडिंग की समस्याएं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ियों के प्रदर्शन और मनोबल को प्रभावित कर सकती हैं।
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स्रोत
India Today

