सेमीकॉन 2.0: सरकार उन्नत चिप्स और प्रतिभा पर दांव लगाती है
भारत सेमीकॉन 2.0 के तहत पांच वर्षों में 1,00,000 सेमीकंडक्टर डिज़ाइन इंजीनियरों को प्रशिक्षित करने की योजना बना रहा है, जिसका उद्देश्य अपनी प्रतिभा पूल को बढ़ाना और चिप प्रौद्योगिकी को आगे बढ़ाना है।
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क्या हुआ?
भारत सेमीकॉन 2.0 के तहत पांच वर्षों में 1,00,000 सेमीकंडक्टर डिज़ाइन इंजीनियरों को प्रशिक्षित करने की योजना बना रहा है, जिसका उद्देश्य अपनी प्रतिभा पूल को बढ़ाना और चिप प्रौद्योगिकी को आगे बढ़ाना है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
यह पहल भारत की सेमीकंडक्टर क्षमताओं को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ा सकती है और वैश्विक निवेश को आकर्षित कर सकती है।
मुख्य बिंदु
- भारत पांच वर्षों में 1,00,000 सेमीकंडक्टर डिज़ाइन इंजीनियरों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखता है।
- यह पहल पहले चरण पर आधारित है, जिसमें लगभग 85,000 इंजीनियरों को प्रशिक्षित किया गया था।
- अगला चरण 7nm-3nm प्रौद्योगिकियों के लिए अनुसंधान और विकास का समर्थन करेगा।
- उम्मीद है कि प्रमुख वैश्विक सेमीकंडक्टर उपकरण निर्माता भारत में उपस्थिति स्थापित करेंगे।
- नए सिलिकॉन फैब के लिए केंद्रीय वित्तीय सहायता 40% तक कम कर दी गई है।
मुख्य अंतर्दृष्टि
- 1,00,000 इंजीनियरों का प्रशिक्षण भारत की वैश्विक सेमीकंडक्टर बाजार में स्थिति को मजबूत कर सकता है।
- वित्तीय सहायता में बदलाव भारत की सेमीकंडक्टर निर्माण में निवेशक विश्वास को दर्शाता है।
- डिज़ाइन-लिंक्ड प्रोत्साहन ढांचे का विस्तार बड़े कंपनियों को सेमीकंडक्टर डिज़ाइन में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है।
- वैश्विक उपकरण निर्माताओं की अपेक्षित उपस्थिति स्थानीय कंपनियों के लिए आपूर्ति श्रृंखला के अवसर पैदा कर सकती है।
AI संक्षिप्त सारांश
भारत सेमीकॉन 2.0 के तहत चिप प्रौद्योगिकी और निर्माण को बढ़ावा देने के लिए 1,00,000 सेमीकंडक्टर इंजीनियरों को प्रशिक्षित करने की योजना बना रहा है।
स्रोत
Times of India

