
उमर खालिद की किताब आईएसईआर पुणे लाइब्रेरी से हटाई गई सोशल मीडिया के विरोध के बाद
क्या हुआ?
किताब 'फ्रैक्चर्ड कम्युनिटीज: आदिवासी इतिहास और शक्ति की राजनीति' को ऑनलाइन आपत्तियों के बाद आईएसईआर पुणे की लाइब्रेरी से हटा दिया गया। इस हटाने ने शैक्षणिक स्वतंत्रता को लेकर विवाद को जन्म दिया है।
मुख्य बिंदु
- यह किताब झारखंड के सिंहभूम क्षेत्र के आदिवासी समुदायों का अध्ययन करती है।
- यह उमर खालिद के डॉक्टरेट शोध पर आधारित है, जिसे 2018 में जेएनयू में प्रस्तुत किया गया था।
- इस किताब को आईएसईआर पुणे की लाइब्रेरी में विवाद से पहले शामिल किया गया था।
- किताब के हटाने के कारण स्पष्ट नहीं हैं।
- जेएनयू में खालिद का संदर्भ देने वाले ग्राफिटी विवादों के बीच उभरे हैं।
मुख्य अंतर्दृष्टि
- यह घटना शैक्षणिक सेटिंग में सेंसरशिप पर चर्चा को जन्म दे सकती है।
- यह सोशल मीडिया के प्रभाव और शैक्षणिक अखंडता के बीच तनाव को उजागर करती है।
- जेएनयू में चल रही ग्राफिटी खालिद के चारों ओर व्यापक राजनीतिक संवाद को दर्शाती है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
किताब का हटाया जाना शैक्षणिक स्वतंत्रता और शैक्षणिक संस्थानों पर सोशल मीडिया के प्रभाव पर सवाल उठाता है।
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स्रोत
Times Now
