
25 दिन का जाल: क्यों भारत के किसान हर अक्टूबर अपनी पराली जलाते हैं
क्या हुआ?
हर अक्टूबर, उत्तर भारत के किसान अगली फसल के लिए खेतों को साफ करने के लिए पराली जलाते हैं। यह प्रथा समय की कमी और वैकल्पिक तरीकों की उच्च लागत से प्रेरित है।
मुख्य बिंदु
- किसान गेहूं की बुवाई के लिए खेतों को जल्दी साफ करने के लिए पराली जलाते हैं।
- मध्य प्रदेश, पंजाब और उत्तर प्रदेश पराली जलाने वाले शीर्ष राज्य हैं।
- 1990 के दशक के मध्य में पेश किए गए कॉम्बाइन हार्वेस्टर के कारण अधिक पराली बचती है।
- किसानों के पास तीन विकल्प हैं: मैनुअल सफाई, मशीनों का उपयोग, या जलाना।
- 80% से अधिक भारतीय किसान छोटे खेतों के मालिक हैं, जिससे जलाना सबसे व्यावहारिक विकल्प बनता है।
- पंजाब संरक्षण अधिनियम बुवाई को सीमित करता है, जिससे किसानों के लिए समय कम हो जाता है।
मुख्य अंतर्दृष्टि
- पराली जलाने पर निर्भरता दीर्घकालिक मिट्टी के क्षय का कारण बन सकती है।
- किसानों पर स्थायी प्रथाओं को अपनाने का दबाव बढ़ सकता है।
- सरकारी नीतियों को किसानों को जलाने से दूर जाने में सहायता करने के लिए अनुकूलित करने की आवश्यकता हो सकती है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
यह मुद्दा उत्तर भारत में वायु गुणवत्ता और कृषि प्रथाओं को प्रभावित करता है।
स्रोत
India Today

